सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना में मरीज से दुर्व्यवहार का आरोप, पत्रकार को दी गई धमकी

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना में मरीज से दुर्व्यवहार का आरोप, पत्रकार को दी गई धमकी
बेलगहना, बिलासपुर। कोटा ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना में उपचार कराने पहुंचे पत्रकार दिलीप सोनवानी ने चिकित्सक डॉ. राधेश्याम तिवारी पर लापरवाही, अभद्र व्यवहार एवं धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पत्रकार दिलीप सोनवानी के पैर में सूजन एवं घाव में पस बनने की समस्या होने पर वे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना पहुंचे। वहां पंजीयन (पर्ची) बनवाने के बाद उनकी मुलाकात डॉ. राधेश्याम तिवारी से हुई। आरोप है कि चिकित्सक द्वारा कुछ दवाइयां एवं मलहम लिखी गईं तथा पांच दिनों तक एंटीबायोटिक इंजेक्शन बाहर से लगवाने की सलाह दी गई। मरीज का आरोप है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार उपलब्ध कराने के बजाय बाहर से इंजेक्शन लगवाने की बात कही गई।
दिलीप सोनवानी का कहना है कि बातचीत के दौरान डॉक्टर द्वारा सम्मानजनक भाषा का उपयोग नहीं किया गया तथा उन्हें “तू-तड़ाक” कर संबोधित किया गया। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र से बाहर निकलकर मामले की जानकारी बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) को फोन पर दी और डॉक्टर के व्यवहार की शिकायत की।
आरोप है कि शिकायत की जानकारी मिलने के कुछ समय बाद डॉ. राधेश्याम तिवारी स्वास्थ्य केंद्र के बाहर आए और पत्रकार दिलीप सोनवानी से बहस करने लगे। शिकायतकर्ता के अनुसार डॉक्टर ने कहा कि “जिसे बताना है बता दो, जहां शिकायत करनी है कर दो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” इस दौरान कथित रूप से धमकी भरे शब्दों का भी प्रयोग किया गया।
पत्रकार का यह भी आरोप है कि जब वे स्वास्थ्य केंद्र की गतिविधियों की जानकारी लेने का प्रयास कर रहे थे, तब उनसे पत्रकार पहचान पत्र दिखाने एवं वीडियो बनाने की अनुमति लाने की बात कही गई। आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र के कुछ कर्मचारियों ने उन्हें घेर लिया और विभिन्न प्रकार की बातें कहकर दबाव बनाने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
मामले को लेकर पत्रकार दिलीप सोनवानी ने संबंधित उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने, डॉक्टर एवं संबंधित कर्मचारियों के व्यवहार की समीक्षा करने तथा मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के साथ इस प्रकार का व्यवहार होगा तो आम लोगों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होगा क्या ऐसे चलेगा स्वास्थ्य विभाग या इन पर सख्त से सख्त कार्यवाही हो।