स्वास्थ्य मंत्री के दावों के बीच कोटा स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और निजी अस्पताल भेजने के आरोप

स्वास्थ्य मंत्री के दावों के बीच कोटा स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और निजी अस्पताल भेजने के आरोप
कोटा। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और सरकारी अस्पतालों में आम जनता को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र से सामने आ रही शिकायतें इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं।
कोटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन परिस्थितियों में डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शिकायत है कि कई बार मरीजों को डॉक्टर के बजाय नर्सिंग स्टाफ के भरोसे उपचार की स्थिति का सामना करना पड़ता है। यदि यह स्थिति सही है तो सवाल यह है कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेदारी आखिर कौन निभा रहा है?
कोटा CHC को लेकर इससे पहले भी डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मरीजों को रेफर किए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। एक पूर्व निरीक्षण संबंधी रिपोर्ट में भी अस्पताल में चिकित्सकों की अनुपस्थिति का उल्लेख किया गया था।
बीएमओ के संचालन पर भी उठ रहे सवाल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के संचालन और व्यवस्थाओं को लेकर बीएमओ डॉ. निखिलेश गुप्ता के स्तर पर भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अस्पताल में डॉक्टरों की ड्यूटी, आपातकालीन सेवा और मरीजों के उपचार की व्यवस्था किस प्रकार सुनिश्चित की जा रही है।
बेलगहना PHC से भी सामने आया कथित विवाद
इसी बीच बेलगहना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर राधेश्याम तिवारी ने पत्रकार दिलीप कुमार सोनवानी के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया।
शिकायत के मुताबिक, मरीज के उपचार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि मरीज का सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार करने के बजाय बाहर किसी निजी अस्पताल में जाकर इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी गई।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टर की जिम्मेदारी से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन सकता है।
स्वास्थ्य विभाग से कई सवाल
अब सवाल यह है कि—
– आपातकालीन स्थिति में कोटा CHC में डॉक्टर उपलब्ध क्यों नहीं रहते?
– क्या अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था की नियमित निगरानी हो रही है?
– मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से निजी अस्पताल जाने की सलाह किन परिस्थितियों में दी जाती है?
– बेलगहना PHC में पत्रकार और मरीज से संबंधित शिकायत की विभागीय जांच हुई या नहीं?
– यदि आरोप सही हैं तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
– क्या स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं इन अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे?
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल लगातार स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की बात करते रहे हैं। ऐसे में बिलासपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आने वाली ऐसी शिकायतें स्वास्थ्य विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल महज शिकायतों तक सीमित रह जाते हैं।