
संजय बंजारे।
शासकीय स्कुलो में पढ़ने वाले बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए, छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन हड़ताल पर बैठे
कोटा विकास खंड मुख्यालय में छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/ समग्र शिक्षक फेडरेशन के आव्हान पर ब्लॉक स्तरीय अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन कोटा एसडीएम कार्यालय के सामने शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन कर रहे है। वही माने तो ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चे शासकीय स्कुलो में अपनी पढ़ाई लिखाई करते है।क्योकि उनके पालक के पास इतनी रकम नही होती है कि वह अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा एक प्राइवेट स्कूलों में भर्ती कराकर अच्छी शिक्षा दे सकें लेकिन जो शिक्षक धरने पर बैठे हैं उन्हीं के बच्चे बड़े-बड़े प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं अगर इन्हीं शिक्षकों के बच्चे उसी सरकारी स्कूल में पढ़ते तो समझ में आता कि बच्चे के भविष्य में क्या असर पड़ेगा इनके बच्चे ट्यूशन जा रहे हैं बाकायदा प्रतिदिन स्कूल भी जा रहे हैं लेकिन शिक्षकों की धरना प्रदर्शन होने की वजह से सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे ना तो स्कूल जा पा रहे हैं और ना ही पढ़ रहे हैं कुछ ही दिनों में सरकारी स्कूल पढ़ने वाले बच्चों का वार्षिक परीक्षा होने वाली है उसको नजरअंदाज करते हुए शिक्षक धरने पर बैठे हैं प्राप्त जानकारी के अनुसार एक शिक्षक को प्रतिमाह 30 हजार से ₹40 हजार वेतन मिलता है तो जाहिर सी बात है धरना प्रदर्शन तो करंगे ही न। एक गरीब परिवार के बच्चे चाहे स्कूल जाए या न जाये इन लोगो को कोई फर्क नही पड़ेगा।क्योंकि इनके बच्चे तो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं और प्रतिदिन ट्यूशन भी जा रहे हैं तो क्या फर्क पड़ेगा। अब देखने वाली बात है कि क्या जो शिक्षक धरना प्रदर्शन करने बैठे वहां बच्चो का क्या कोर्स पूरा कर पाएंगे?
हड़ताल पर बैठे एक शिक्षक ने अपनी उध्बोधन में यहां तक कह डाला कि एक लाख नौ हजार शिक्षक अगर परीक्षा के समय धरना में बैठ जाये तो परिणाम क्या होगा धरने में बैठे शिक्षक को इस बात का ज्ञान है कि कुछ दिनों में बच्चों का परीक्षा होने वाली है फिर भी इस प्रकार धरना देना कितना उचित है।